जीवन में कितनी भी विकट परिस्तिथियां आएं,मनुष्य को धर्म संस्कार नही छोड़ना चाहिए-साध्वी ऋतु पाण्डेय

भागवत कथा के अंतिम दिन भक्तिरस में डूबा पंडाल

भागवत कथा में पहुँचे रिटायर्ड कमिश्नर महेशचंद्र चौधरी एवं युवक कांग्रेस के पूर्व राष्ट्रीय सचिव अनिरुद्ध प्रताप

*दबोह-
नगर दबोह क्षेत्र के प्रसिद्ध धार्मिक स्थल मंदिर सिद्धेश्वर महादेव मंदिर मोनी योगाआश्रम दबोह में गोरा,बरथरा,बड़ागाँव, कसल,अंधियारी,दबोह क्षेत्र के समस्त धर्मप्रेमियों के जन सहयोग से दिनांक 21 सितंबर 2021 मंगलवार से श्रीमद् भागवत कथा का आयोजन प्रारंभ हो गया है आयोजित श्रीमद्भागवत कथा के सातवें दिन दिन सोमवार को कथावाचक साध्वी ऋतु पाण्डेय जी ने कहा कथा सुनने से मानव जीवन में संस्कार का उदय होता है जीवन में कितनी भी विकट परिस्थिति क्यों न आ जाए मुनष्य को अपना धर्म व संस्कार नहीं छोड़ना चाहिए ऐसे ही मनुष्य जीवन के रहस्य को समझ सकते हैं कहा कि जिसकी भगवान के चरणों में प्रगाण प्रीति है,वही जीवन धन्य है ईश्वर ने विभिन्न लीलाओं के माध्यम से जो आदर्श प्रस्तुत किया,उसे हर व्यक्ति को ग्रहण करना चाहिए ऐसा करने से जीवन मूल्यों के बारे में जानकारी मिलने के साथ-साथ अपने कर्तव्य को भी समझा जा सकता है मनुष्य स्वंय को भगवान बनाने के बजाय प्रभु का दास बनने का प्रयास करें,क्योंकि भक्ति भाव देख कर जब प्रभु में वात्सल्य जागता है तो वे सब कुछ छोड़ कर अपने भक्तरूपी संतान के पास दौड़े चले आते है गृहस्थ जीवन में मनुष्य तनाव में जीता है,जब कि संत सद्भाव में जीता है यदि संत नहीं बन सकते तो संतोषी बन जाओ संतोष सबसे बड़ा धन है उन्होंने बताया भगवान श्रीकृष्ण की सिर्फ 8 पत्नियां थी जिनके नाम रुक्मणि, जाम्बवन्ती, सत्यभामा, कालिन्दी, मित्रबिन्दा, सत्या, भद्रा और लक्ष्मणा था. पुराणों के अनुसार कृष्ण की 1 लाख 61 हजार 80 पुत्र इतना ही नहीं, उनकी सभी स्त्रियों के 10-10 पुत्र और एक-एक पुत्री भी उत्पन्न हुई उन्होंने कहा श्रीमद् भागवत कथा ज्ञान यज्ञ के सातवें दिन श्रीकृष्ण भक्त एवं बाल सखा सुदामा के चरित्र का वर्णन,श्रीमद्भागवत तथा श्रीव्यास पूजन किया कथावाचक साध्वी ऋतु पाण्डेय ने कथा के दौरान श्रीकृष्ण एवं सुदामा की मित्रता के बारे में जानकारी देते हुए बताया कि सुदामा के आने की खबर पाकर किस प्रकार श्रीकृष्ण दौड़ते हुए दरवाजे तक गए थे पानी परात को हाथ छूवो नाहीं,नैनन के जल से पग धोये श्री कृष्ण अपने बाल सखा सुदामा की आवभगत में इतने विभोर हो गए के द्वारका के नाथ हाथ जोड़कर और अंग लिपटाकर जल भरे नेत्रों से सुदामा का हालचाल पूछने लगे उन्होंने बताया कि इस प्रसंग से हमें यह शिक्षा मिलती है कि मित्रता में कभी धन दौलत आड़े नहीं आती है ऋतु पाण्डेय ने सुदामा चरित्र की कथा का प्रसंग सुनाकर श्रद्धालुओं को मंत्रमुग्ध कर दिया ‘स्व दामा यस्य स: सुदामा अर्थात अपनी इंद्रियों का दमन कर ले वही सुदामा है सुदामा की मित्रता भगवान के साथ नि:स्वार्थ थी, उन्होने कभी उनसे सुख साधन या आर्थिक लाभ प्राप्त करने की कामना नहीं की,लेकिन सुदामा की पत्नी द्वारा पोटली में भेजे गए, चावलों में भगवान श्री कृष्ण से सारी हकीकत कह दी और प्रभु ने बिन मांगे ही सुदामा को सब कुछ प्रदान कर दिया भागवत ज्ञान यज्ञ के सातवें दिन कथा मे सुदामा चरित्र का वाचन हुआ तो मौजूद श्रद्धालुओं के आखों से अश्रु बहने लगे उन्होंने कहा श्री कृष्ण भक्त वत्सल हैं सभी के दिलों में विहार करते हैं जरूरत है तो सिर्फ शुद्ध ह्रदय से उन्हें पहचानने की है अंत मे खेली गई फूलों की होली श्रीमद् भागवत कथा के सातवें दिन सुदामा चरित्र की कथा सुनकर एवं कृष्ण एवं सुदामा के मिलन की झांकी का द्रश्य देख कथा स्थल में मौजूद समस्त भक्तगण भाव विभोर हो गए। कथा के अंत में फूलों की होली व शुकदेव विदाई का आयोजन किया गया श्रीमद भागवत कथा पंडाल में हजारों श्रदालु,भक्त,संत महात्मा,आदि मौजूद रहे,कथा में पारीक्षत संजू देवी पत्नी बीरबल सिंह कौरव गोरा को बनाया गया,कार्यक्रम सयोंजक पूर्व सरपंच बड़ागाँव पंडित किशोरी पाराशर जी के द्वारा आयोजन में सहयोग किया जा रहा है…!

भागवत कथा में पहुँचे रिटायर्ड कमिश्नर महेशचंद्र चौधरी एवं युवक कांग्रेस के पूर्व राष्ट्रीय सचिव अनिरुद्ध प्रताप सिंह

नगर में आयोजित संगीतमय श्रीमद् भागवत कथा में पहुँचे रिटायर्ड कमिश्नर महेशचंद्र चौधरी,उन्होंने श्रीमदभागवत पुराण का पूजन किया तथा कथावाचक साध्वी ऋतु पाण्डेय जी को पुष्प,फलों से भरी टोकरी भेट कर आशीर्वाद लिया उन्होने इस दौरान कहा हर एक व्यक्ति को एक बात का ध्यान जरूर रखना चाहिए कि जो वो कार्य कर रहा है,उसमें भगवान की प्रसन्नता है या नहीं कर्म का सार ये है तभी वो कार्य आपका सफल होगा उन्होंने कहा कि अगर आप व्यक्ति की प्रसन्नता के लिए कार्य कर रहे है वो आपको नजर अंदाज कर सकता है,पर भगवान जिनकी नजर में हम सब रहते है वो आपको नजर अंदाज कभी नहीं कर सकता भगवान के दर पर जाने से सब पवित्र हो जाते है इसी तरह भगवान की कथा सुनने से भी सब पवित्र हो जाते है उन्होंने कहा कि हम लोग सोचते है कि भगवान की संतों पर ज्यादा कृपा होती है,पर ऐसी बात नहीं है भगवान सब पर कृपा करते हैं हम उस कृपा को कितना समझ पाते है यह हम पर निर्भर करता है,इस दौरान युवक कांग्रेस के पूर्व राष्ट्रीय सचिव अनिरुद्ध प्रताप सिंह ने कथावाचक से आशीर्वाद लिया.

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Author: thehind today

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