ग्वालियर हाईकाेर्ट ने दी अचलेश्वर न्यास में नियुक्त रिसीवराें काे चेतावनी, काम नहीं कर पा रहे ताे बताएं, ताकि दूसरी व्यवस्था की जा सके

ग्वालियर। अपर सत्र न्यायालय ने अचलेश्वर मंदिर के संचालन के लिए दो रिसीवर नियुक्त किए थे। इन रिसीवरों को मंदिर के संचालन के साथ-साथ ट्रस्ट का बायलाज बनाना था और संपत्तियों का सत्यापन करना था। कोर्ट ने 13 बिंदु निर्धारित किए थे, जिन पर रिसीवरों को काम करना था। छह माह में रिसीवरों ने कोर्ट के दिशा निर्देशों के अनुसार कार्य नहीं किया। न बायलाज बनाया और न संपत्तियों का निर्धारण किया। रिसीवरों ने छह माह में जो कार्य किया, उसकी रिपोर्ट कोर्ट में पेश की। इस रिपोर्ट को लेकर कोर्ट ने नाराजगी जताई है। कोर्ट ने कहा कि यदि 13 बिंदुओं पर कार्य नहीं कर पा रहे हैं तो उसकी जानकारी दें, ताकि दूसरी व्यवस्था की जा सके। तीन सितंबर को कोर्ट में फिर से सुनवाई होगी।

कोर्ट ने अचलेश्वर महादेव न्यास में अनियमितताएं बढ़ने पर न्यास की कार्यकारिणी काे भंग कर दिया था और रिसीवर नियुक्त किए। कोर्ट ने सबसे पहले विनोद भारद्वाज को रिसीवर नियुक्त किया, लेकिन उन्होंने कार्यभार संभालने के एक माह के अंदर इस्तीफा दे दिया। जिसके चलते कोर्ट ने सेवानिवृत्त न्यायाधीश अवधेश श्रीवास्तव को मुख्य रिसीवर व सेवानिवृत्त जिला न्यायाधीश संजय चतुर्वेदी को रिसीवर नियुक्त किया गया। इन्हें अपनी सुविधा के अनुसार कार्य विभाजन का आदेश दिया था। छह माह से ये कोर्ट के आदेश पर अचलेश्वर महादेव मंदिर न्यास का संचालन कर रहे हैं। कार्यभार संभालने के बाद जो कार्य किए, उसकी कोर्ट ने रिपोर्ट मांगी। उन्होंने बताया कि पुजारियों की व्यवस्था कर दी है। उनका वेतन निर्धारित कर दिया है, आदि कार्यों की जानकारी दी, लेकिन रिसीवर नियुक्त करने का जो उद्देश्य था, उसकी पूर्ति नहीं की। इसके चलते उन्हें चेतावनी दी है।

रिसीवरों को यह करने थे कार्य, जिससे मंदिर का संचालन हो सके
-भविष्य में मंदिर का संचालन व कार्यकारिणी गठन के लिए बेहतर और पारदर्शी, सरल बायलाज तैयार करेंगे। जून 2005 के बाद से लेखाओं का परीक्षण कराएंगे। परिसंपत्तियों का सत्यापन भी कराएंगे। मंदिर का निर्माण अधूरा है। उसका निर्माण कार्य पूरा कराएंगे।

-मंदिर की संपत्तियों की एक सूची तैयार करना होगी। मंदिर में प्राप्त होने वाले दान को खातों में जमा करने के लिए व्यवस्था कराना होगी। कैशबुक का संधारण भी कराना होगा।

-मंदिर की संपत्तियों पर कोई अतिक्रमण है, उन्हें चिन्हित कर जिला प्रशासन की मदद से हटवाएंगे

-दान की राशि जमा करने के लिए स्पष्ट जानकारी प्रदर्शित की जाए। दान की राशि की जिम्मेदारी किसी व्यक्तिगत को न दी जाए, दानपेटी में डाली जाए या कार्यालय में रसीद देकर जमा की जाए।

-मंदिर ट्रस्ट के भविष्य में होने वाले चुनाव में धर्मावलंबी व शहर के नागरिकों को जोड़ा जाए। सूचना प्रकाशित की जाए, ताकि वह भी सदस्य बन सकें। इसके लिए सदस्यता अभियान भी चलाया जाए।

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Author: thehind today

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